सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। 370 को हटाना संवैधानिक तौर पर सही है।

1947 को जम्मू और कश्मीर के आखिरी राजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने को लेकर एक विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ। जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद-1 के तहत भारत का एक राज्य घोषित किया गया। जबकि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा आर्टिकल 370 ने दिया।

1951 मे जम्मू-कश्मीर के संविधान का मसौदा तैयार करने को लेकर संविधान सभा की पहली बैठक हुई। इसमें सभी सदस्य शेख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से थे।

1956 मे जम्मू-कश्मीर ने खुद को भारत का अभिन्न अंग घोषित कर दिया और अपना संविधान अपनाया।

1975 मे इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर की स्थिति को भारत के अभिन्न अंग के रूप में फिर से पुष्टि की गई।

80 और 90 के दशक में कश्मीर आतंकी गतिविधियों से जूझता रहा है। इस दौरान कश्मीरी पंडितों का पलायन भी हुआ।

 मार्च 2015 में भाजपा ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में पहली बार सरकार बनाई।

साल 2018 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूट गया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नवंबर 2018 में विधानसभा भंग कर दी।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर से संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने के लिए एक बिल को संसद से पेश किया था, जिसे मंजूरी मिलने के बाद आर्टिकल 370 निरस्त हो गया।

2023 मे सुप्रीम कोर्ट मे जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर 16 दिन तक सुनवाई चली। इस मामले में दो अगस्त को बहस पूरी हुई और पांच सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया।

11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल, चार महीने 6 दिन के बाद आर्टिकल 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया। 

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