क्या तुम्हें पता है? तुम पढ क्यों रहे हो? तुम School क्यों जाते हो?

तुम School क्यो जाते हो? सिर्फ इसलिये क्योकि Parent भेज रहे हैं या उन्होने कहा कि पढ-लिखकर अच्छे इंसान बनोगे, Life मे कुछ करने के काबिल बन जाओगे, अच्छी नौकरी मिलेगी, पैसा कमा सकोगे, Life मे Settle हो जाओगे?
या तुम खुद सोचते हो की पढ-लिखकर ही हम Life मे कुछ Achieve कर सकते हैं। Doctor, Engineer, CA, IAS, IPS etc. बन सकते हैं। आपको यकिन है कि आपका ये सपना सच होगा, क्योंकि आपको ऐसा सपना दिखाकर ऐसा ही सोचने पर मजबूर किया गया है लेकिन ये Answer भी आपका सिर्फ एक अनुमान ही है।
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“काबिल बनो – सफलता झकमारकर पीछे आयेगी” – Author – CA DevRatna
आओ आज हम इन सपनों की हकीकत पर एक नजर डालते हैं। परखते हैं कि क्या सचमुच ऐसा हो सकता है जैसा आपको बताया जा रहा है?
उद्देश्य हीन दौड़ (Aimless race):
यदि आप ऐसा सोचते हैं तो मै आपको बता दूँ कि आप और आपके Parents, उस भविष्य के सुखद सपने देख रहे हैं जिसका सच आप 20-22 साल बाद जान पाएंगे। क्योकि जब तक आप पढकर निकलोगे, आपके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण 20-22 साल मुठ्ठी से रेट की तरह फिसल चुके होंगे।
आप तो इस बात से अनजान है क्योंकि आपने दूसरों (Parents) पर भरोसा करके अपने जीवन की बागडोर उनके हाथों सौप दी है लेकिन उन लोगों को आप क्या कहेंगे जो आपको भविष्य के सपने दिखाकर ऐसे मार्ग पर चलने को मजबूर कर रहे हैं। क्योंकि ऐसे ही सपने उन्हें (आपके Parents को) भी उनके Parents ने दिखाए गये थे लेकिन अब ये जानते हैं कि असलियत क्या है? फिर भी आपको आपके Parents इस सत्य से अनभिज्ञ रखते हैं, क्यों?
वे Parents दोषी नहीं हैं जो अपने बच्चों को पढ़ने भेजने से पहले यह स्पष्ट कर देते हैं कि ये पढ़ाई सिर्फ तुमको अधकचरे ज्ञान से भरेगी या इस पढ़ाई से उन्होंने जो पाया है, खोया है उसके बारे मे वो अपने बच्चों को अच्छे से बात दें लेकिन मेरे देखते आज तक किसी Parents ने अपने बच्चों से इस तरह का ईमानदार बर्ताव नहीं किया। यदि आप ऐसे किसी Parents के बारे मे जानते हैं तो मुझे जरूर बताना।
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क्या आपको पता है आप School क्यों जा रहे हैं? आप तो क्या आपको स्कूल भेजने वाले भी इससे अब भी अनजान हैं जबकि वो ये सफर तय करके आज ऐसे मुकाम पर खड़े हैं, जहाँ उनके हाथ कुछ नहीं लगा फिर भी वो आपको उसी राह पर चलते देखना चाहते हैं, क्यों? तो क्या वे अपने Parents का बदला आपसे लेना चाहते हैं?
मंजिल का पता नहीं पर सफर जरूरी है
हम अपने जीवन मे कोई भी काम किसी Purpose के लिये करते हैं, ये सभी जानते हैं। जैसे आप खाना खाते हैं ताकि आपको ऊर्जा मिले और आप अपने काम कर सकें, सोचो यदि आप खाना खाएं लेकिन उससे ऊर्जा न मिले बल्कि आप बीमार पड जाओ तो क्या आप ऐसा खाना हमेशा खाते रहेंगे, नहीं न!
लेकिन पढ़ाई के मामले मे पीढ़ी दर पीढ़ी यही होता आ रहा है। ये बहुत लोग जानते हैं फिर भी हम ऐसी पढ़ाई को नहीं बदलना चाहते, क्यों? कोई मंजिल नहीं बस पढे चले जा रहे हैं।
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तुम पढ क्यों रहे हो? क्या हो रहा है या होगा आप के साथ? एक कहानी से समझाता हूँ:
एक बस स्टैंड पर बसें दिल्ली जा रही हैं, उसके Conductor जोर-जोर से चिल्लाकर लोगों को बुला रहे हैं। लोगों को अपनी-अपनी बस की खूबियाँ गिनवा रहे हैं, पहले कितने लोगों को वो दिल्ली पहुंचा चुके, वहाँ लोग कितने खुश है, सफर कितना आनंददायक रहेगा, सफर मे क्या-क्या सुविधाएं दी जाएंगी ये सब बता रहे हैं। दिल्ली और अपनी बस के बारे मे और भी बहुत कुछ बता रहा हैं।
लोग उनकी बातों से बहुत प्रभावित हो रहे हैं और अपने बच्चों को उनकी बस मे भेजने को आतुर दिख रहे हैं। ये देखकर बस वाले किराये मे मनमर्जी बढ़ोतरी किये जा रहे हैं लेकिन Parents भी कम नहीं, जिसकी जितनी सामर्थ, उससे आगे बढ़कर, अपने बच्चे को बस मे चढ़ाने के लिये जद्दोजहद कर रहे हैं। कुछ बच्चे बस मे चढ़ने को तैयार नहीं पर उनके Parents और बस वाले उन्हे जबरदस्ती अपनी बसों पर चढ़ा रहे हैं।
बसें भर गयी और चल पड़ी। मै जिस बस मे था अब मै उसके बारे मे आपको बताता हूँ:
सफर शुरू हुआ, मै बस मे बैठे और बच्चों की ही तरह एक-दूसरे से अनजान गुमसुम सा अपनी सीट पर बैठ गया। बस वाले इस सबसे अंजान या जानते हुए भी हमे अनदेखा कर अपनी बस अपनी रफ्तार से चलाये जा रहे थे। बिच मे कोई बच्चा कोई शिकायत करता तो बस वाले उसे डॉटकर या पुचकारकर चुप करा देते और वापस अपनी सीट पर बिठा देते, कुछ बच्चे ये देखकर सहम जाते और चुपचाप बैठे रहते। कुछ गुमसुम तो कुछ सिसकियाँ भरते अपना सफर काटने को मजबूर दिखते।
समय बीतता गया सफर चलता रहा। पहला Stop आया मैंने सोचा दिल्ली आ गया, मै उतरने की तैयारी कर ही रहा था कि बस वालों ने कहा – बैठ जाओ अभी दिल्ली बहुत दूर है! बस फिर हर Stop पर यही होता, मै उतरने को होता और बस वाले कभी स्पष्ट कह देते, दिल्ली नहीं है ये या कभी फुसलाते कि बस थोड़ी दूर और फिर दिल्ली आने ही वाला है।
मै 18 का हो गया और आज हम दिल्ली पहुँचने वाले थे। मै बहुत उत्साहित था इतने सालों के बाद ही सहीं आज बस और बसवालों से पीछा छूटने वाला था लेकिन ये क्या? बस रुकी सभी बच्चों के साथ मै भी उतरा लेकिन बच्चे इस बस से उतरकर दूसरी बस मे चढ़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं और उनके Parents भी उन्हे दूसरी बस मे चढ़ाने के लिये अपना पूरा जोर लगा रहे हैं।
मै घबराकर अपने Parents के पास गया और उनसे पूछा ये क्या हो रहा है? तो उन्होंने बताया ये तो दिल्ली का Outer है दिल्ली तक पहुँचने के लिये तुम्हें दूसरी बस मे चढ़ना पड़ेगा। मैंने विरोध करना चाहा लेकिन कुछ न हो सका और मुझे भी दूसरे बच्चों की तरह दूसरी बस मे चढ़ना ही पड़ा।
नई बस मे कुछ पुराने तो कुछ नये चेहरे दिखे। बस वाले भी नये थे फिर बस चल पड़ी नये सफर पर। Stop आते रहे बसें बदलती रहीं पर मै दिल्ली नहीं पहुँच सका, सभी बसें Outer road पर ही घूमती रहीं। हर बार मुझे या तो डराकर या फुसलाकर अगले सफर के लिये राजी कर लिया जाता।
जब मै थक गया और मेरे Parents भी अगली बस का किराया न भर सके तो मुझे बस से उतरना पड़ा। तब तक मै 26 का हो चुका था। दिल्ली तो पहुंचा नहीं, घर वालों ने भी रास्ते मे छोड़ दिया। ये कहकर कि अब आगे कहाँ जाना है, क्या करना है खुद देखो! हमसे जितना बना हमने तुम्हें उतना सफर करवा दिया।
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“Topper’s Secret – SUCCESS WINDOW” – CA DevRatna
आपको तो पता ही होगा, इंसान की Life मे ऐसी Situation आती है तो उसे क्या कहते हैं, अरे वही “धोबी का कुत्ता घर का न घाट का”
धोबी का कुत्ता होने से बचो
यदि आप अपनी Life मे ऐसी Situation create नहीं होने देना चाहते तो आज ही जागो और खुद को बचाने कि पहल शुरू कर दो।अब इसकी शुरुवात उन्ही लोगों से कुछ सवाल पूछकर करो जिन्होने आपको School भेजा है और तुम्हे ऐसे सपने दिखाये हैं। वो ही हैं जो आपको हकीकत से वाकिफ करवा सकते हैं बशर्ते वे आपका हित चाहते हो और खुद ईमानदार हों, क्योकि वो इस दौर से गुजर चुके हैं।
पहला प्रश्न – आप भी School गये थे, यही सब आपसे भी कहा गया होगा, जो आप हमसे कहते हैं, तो क्या आपके वो सपने पूरे हुये? आपने अपने जीवन मे इस रास्ते चलकर वो मुकाम हासिल किया जो आपको बताया गया था? नही हुये तो उसके क्या कारण थे? यदि मै उन कारणों से पार पा लूं तो क्या मै उन सपनो को हासिल कर पाऊंगा?
अगर इसकी 50% भी Surety वो देते हैं तो आपका ऐसे School जाना Worthy है। Otherwise आप अपनी Life का ये Golden period और Parent का Hard earned money बर्बाद करने जा रहे हैं।
फिर भी यदि आप उनकी बातों को मानते हैं क्योकि वे आपके Parents हैं Respected हैं या कोई और कारण से तो 20-22 साल के बाद आपके जीवन मे आने वाली समस्याओं पर भी गौर कर लेते हैं। ये मेरी परिकल्पना नही है मेरा अनुभव है, आप भी थोडा सजग होकर अपने ऑख-कान खोलकर देखेंगे तो ये नजारे आपको अपने घर, आस-पडोस, गॉव, शहर मे ही देखने सुनने को मिल जायेंगे।
20-22 साल बाद क्या होगा अंजाम?
पढाई पूरी करने के बाद आप अपनी डिग्री, डिप्लोमा लेकर तीन काम करोगे
- यदि आपके घर वाले Financially sound हैं तो आप Competitive exams की तैयारी करोगे। वहॉ फिर आपको abc से शुरु करना पडेगा Means 20-22 साल की पढाई सिर्फ इन Competitive exams मे बैढने की पात्रता (Eligibility) भर है। Life मे फिर वही uncertainty बनी रहेगी Competitive exam clear होगा तो ……..
- नौकरी ढूंढने निकलोगे तो नौकरी देने वाले आपकी डिग्री, डिप्लोमा देखकर आपको नौकरी नही देंगे Means आपकी 20-22 साल की मेहनत एक पल मे नकार दी गई। यहॉ भी सिर्फ 20-22 साल की पढाई पात्रता मात्र (Minimum qualification) है।
- सब प्रयासों मे असफल होने के बाद यदि आप कोई व्यापार-व्यवसाय शुरु करना चाहोगे। इसके लिये (Capital) पैसा चाहिये तो आप Loan लेने जाओगे और डिग्री, डिप्लोमा के Base पर आपको कोई Loan नही देगा, आपसे Collateral security मॉगी जायेगी, साथ ही ज्ञान मिलेगा पहले काम का Experience लो। Means 20-22 साल की पढाई यहॉ भी सिर्फ Eligibility ही मानी जायेगी।
अब आप क्या करोगे? निराश हो जाओगे, खुद को बहुत सी समस्याओं से घिरा पाओगे, समय मुठ्ठी से रेत की तरह सरकता जायेगा तब सोचोगे 20-22 साल बर्बाद कर दिये इससे अच्छा तो कोई काम सीख लिया होता, रोजी-रोटी तो चलती और लोगों के सामने गिडगिडाना भी नही पडती पर… पर… पर… दुनिया मे जीना है तो काम कर प्यारे झुककर सबको सलाम कर प्यारे ……….
बस इतने पर ही बात रुक जाये तो भी ठीक है पर ये तो सिर्फ आपकी Problems का Trailer मात्र था असली Picture तो अब शुरु होगी।
सब जगह हाथ-पैर मारकर आप अपनों (Parents, Respective) के पास इस उम्मीद से जायेंगे कि उन्होने ही ये रास्ता दिखाया था और मैने जैसा बना पूरी ईमानदारी से उनके कहने पर पढाई-लिखाई की, अब वे ही मेरी आगे की जींदगी की नैया भी पार लगायेंगे। लेकिन आप जैसे ही उनसे मदद (Obviously financial help) मॉगेगे तो आपको उनसे एक ही उत्तर मिलेगा, चाहे वो आपको प्यार से समझाकर बताये या चिल्लाकर कहें – हमारे पास जो कुछ था तेरी पढाई-लिखाई मे लगा दिया, अब और नही है बर्बाद करने को। पढा-लिखा के काबिल बना दिया, ये कम है क्या? जाओ कमाओ, हम सारी उम्र तो तुम्हे पाल नही सकते।
अब क्या करोगे प्यारे! तुम्हारी Life Reel नही Real है
बात अभी भी यहॉ खत्म नही होगी अब आपकी Life आपको सजा लगने लगेगी क्योकि आज तक जो आपके अपने थे, अब वो भी आपसे परायों सा व्यवहार करने लगेंगे, आपको अपने ही घर मे हिकारत भरी नजरों से देखा जायेगा और भी बहुत कुछ होगा समझदार को ईशारा काफि क्योकि कमाऊ पूत सबको प्यारा होता है, नाकारे को सिर्फ दुत्कार मिलती है।
अब आप पूरी जींदगी यही Calculate करते रहोगे कि मेरी गलती कहॉ थी फिर मेरे ही साथ ये सब क्यो हुआ? क्या मेरी किस्मत मे यही लिखा था Bla bla bla…
पर तब पछताये होत का जब चिडिया चुग-गई खेत……..
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अपनी किस्मत दूसरों को मत लिखने दो
समझ गये तो वक्त रहते सम्भल जाओ वर्ना हो सकता है तुम खुद कहो, मेरी किस्मत ही खराब है, ऊपर वाले ने मेरी ही किस्मत मे ये सब लिखना था क्योंकि नीचे वालों पर जब आपका बस नहीं चलता तो आखिर मे कोसने को ऊपर वाला ही तो रह जाता है……….
लेकिन अभी भी ऐसी किस्मत से बचने के दो उपाय हैं आपके पास
- उन लोगों से अभी Legal agreement कर लो कि आपके कहने पर चल रहा हूं अगर आपके कहे अनुसार Result नही मिला तो मै किसी भी तरह उसका जवाबदार नही होऊंगा और फिर मै जो करना चहूंगा उसके लिये आप मेरी हर प्रकार से मदद करेंगे, तब आप इंकार नही कर सकते।
- आज से ही वो रास्ता पकडो, वो तरीका अपनाओ जिससे पढाई कर आप Eligible भी बन सको और निश्चित कमाई भी कर सको ताकि आपको भविष्य मे ऐसे दिन ना देखने पडे।
थोड़ी हिम्मत और कोशिश से पहला तरीका आप स्वयं अपना सकते हैं।
दूसरे तरीके के लिये आप बेझिझक मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं।
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