What is Best Introduction? Why it is Important? परिचय – क्या जरूरत है इसकी?
जैसे ही मै आपसे मुखातिब होता हूँ, सबसे पहले आप मेरा परिचय (Introduction) जानना चाहते हैं, क्यों? कभी सोचा है इस बारे मे। नहीं ना!
तो आईये आज सोचते हैं, मै आपके साथ अपने सफर का आगाज इसी चर्चा के साथ शुरू करता हूँ।
परिचय –
Introduction का मतलब किसी के बारे मे सामान्य जानकारियाँ हासिल करना जैसे नाम, उसका काम, क्या करता है? कहाँ राहत है? परिवार आदि। इससे अधिक हम ‘परिचय’ को नहीं जानते, चाहे वो अपने बारे मे देना हो या किसी का जानना हो लेकिन ‘परिचय’ मे बहुत कुछ होता है पर कभी हमने इस बारे मे सोचा नहीं।
यकिन नहीं आता तो खुद ही देख लो, जब कोई आपसे कहता है, अपना परिचय दो तब आप अपने बारे मे क्या-क्या बताते हैं और कितनी देर बताते हैं? मै विश्वास से कह सकता हूँ, आप 2 मिनिट भी अपने बारे मे नहीं बोल सकते, विश्वास ना हो तो अभी घड़ी लगाकर, बोलकर देख लो। अब सोचो यदि आप 20 साल के हो तो कोई आपके बारे मे 1 मिनिट मे क्या जान सकता है? और आप अपने 20 साल के जीवन को 1 मिनिट मे कैसे बता सकते हैं?

परिचय से क्या होता है?
क्या हम किसी का परिचय (Introduction) जाने बगैर उससे संबंध बना सकते हैं? अवश्य ही, लेकिन जब हम किसी से परिचित हुये बगैर कोई संबंध स्थापित करते है तो वह बहुत ही Formal होता है, ये ऐसे ही है जैसे आप किसी चाय-पान कि टपरी पर खड़े होकर किसी अजनबी से राजनीति की, क्रिकेट की या किसी प्रचलित विषय पर बात करने लगते हैं, उसे अपने विचारों से अवगत कराते हैं, उसके विचारों को सुनते हैं। चर्चा गरम हो जाये तो तीखी नौक-झौक भी हो जाती है, कोई बीच-बचाव भी कर लेता है लेकिन जैसे ही चर्चा खत्म होती है सभी सामान्य हो जाते हैं।
लेकिन जब आप किसी से परिचित होते है, उसके बारे मे जानते हैं उसे अपने बारे मे बताते हैं तब आप उसके साथ वैसे पेश नहीं आ सकते जैसे आप एक अजनबी से पेश आते हैं। पान की टपरी पर एक अजनबी से बात करते वक्त आप बात करते हैं, बिंदास वैसे ही जैसे आप हो लेकिन जैसे ही आप किसी से परिचित होते हो आप उससे बात करते समय आप नहीं रह जाते, क्यों? ये परिवर्तन क्यों हो जाता है? आप, आप क्यों नहीं रह पाते हो? कोई और क्यों हो जाते हो?
To be continue