Atal Bihari Bajpayee – अनोखा व्यक्तित्व

Atal Bihari Bajpayee का जन्म उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर मे शिन्दे की छावनी (ग्वालियर रियासत की) में 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त में वहाँ के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी (जो मध्यप्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे) और उनकी पत्नी कृष्णा वाजपेयी के यहाँ हुआ था। उनके पिता हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि थे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एम॰ए॰ (M.A) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ कानपुर में ही एल॰एल॰बी॰ (Law) की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही छोड़कर वे संघ के कार्य में जुट गये। उन्होंने डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जैसे नेताओं से राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते किया।
बटेश्वर की सबसे बड़ी विशेषता वहाँ के हिंदू मंदिरों का सदियों पुराना परिसर है, गांव से लगभग 80 किलोमीटर पश्चिम में आगरा शहर है, जहां ताज महल है और जो कभी मुगल साम्राज्य की राजधानी थी। क्षेत्र में 20वीं सदी की एक लोकप्रिय अफवाह के अनुसार, “आगरा का गौरव बटेश्वर की कीमत पर आया था, इस्लामी आक्रमणों ने देवताओं के इस निवास को बर्बाद कर दिया था।” इससे ही एक कवि के रूप में वाजपेयी जी ने अपनी शुरुवात की, कहा जाता है कि अपनी सबसे पुरानी जीवित कविता, ‘ताजमहल’ में, वाजपेयी ने प्रतिष्ठित स्मारक के निर्माण के दौरान मुगलों द्वारा हिंदू श्रमिकों के स्पष्ट शोषण पर शोक व्यक्त किया है।
वाजपेयी जी के अद्भुत किस्से

जब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा एक दिन अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री होंगे
अटल जी के कार्यकाल में भारत में इतनी सड़कों का निर्माण हुआ जितनी शेरशाह सूरी के शासनकाल में हुआ था। अटल जी इतने बड़े नेता थे कि विरोधी दलों के बीच भी उनका बेहद सम्मान था। एक बार तो पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भविष्यवाणी करते हुए ये तक कह दिया था कि एक दिन अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री होंगे। दुनिया को भारत की परमाणु शक्ति का एहसास दिलाने वाले भी बाजपेयी जी ही थे।
‘बाप जी’ के नाम से भी अटलजी को जाना जाता था
अटल जी ने कभी शादी नहीं की थी परन्तु एक लड़की को गोद लिया था जिसका नाम नमिता है। Atal Bihari Vajpayee को उनके करीबी दोस्त और रिश्तेदार कहकर बुलाते थे। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में उन्होंने भी भाग लिया था और वे 24 दिन तक कारावास में रहे थे। राजनीति के अलावा उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी ख्याति हासिल की। अटल जी ने कई पुस्तकों की रचना की, उनको कविताओं से भी खासा लगाव रहा। आज भी उनकी लिखी हुई कविताएं पढ़ी जाती है।
पिता और पुत्र ने एक साथ DAV कॉलेज मे लिया दाखिला
1945 में, जब 21 साल के अटल बिहारी वाजपेयी ने कानून की पढ़ाई के कॉलेज में दाखिला लिया तो उनके एक सहपाठी उनके पिता ही थे जो शिक्षक के रूप में अपनी 30 साल की सेवा देकर रिटायर हो चुके थे। Atal Bihari Vajpayee ने लॉ की पढ़ाई अपने पिता के साथ कानपुर के डीएवी कॉलेज से की। दोनों ने एक ही कक्षा में लॉ की डिग्री हासिल की और इस दौरान दोनों एक ही साथ हॉस्टल में भी रहे। दरअसल अटल जी के पिता पंडित कृष्णबिहारीलाल वाजपेई, जब कानपुर के DAV कॉलेज में वाजपेई जी के सहपाठी बने, तब उनकी उम्र 50 साल से ज्यादा थी।
जब चली अटल जी की शादी की बात

ये किस्सा 1944 का है। उस वक्त उनके परिवार में अटल जी की शादी की बात चली। अटल जी अपनी शादी की बात सुनकर भागकर कहीं छिप गए। अटल जी अपनी शादी की बात से इतना डर गए थे कि, कानपुर देहात के गांव रायपुर में अटल जी अपने दोस्त के घर में तीन दिन तक छिपकर लापता रहे। ।
Atal Bihari Vajpayee एक अच्छे नेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पत्रकार भी थे। अटलजी, स्वदेश अखबार लखनऊ के संपादक हुआ करते थे। ये उन्हीं दिनों की बात है, कानपुर में उनकी बहन की शादी होने वाली थी। शादी की तैयारियों के बीच नानाजी देशमुख ने अटलजी से कहा था कि तुम्हारी बहन की शादी है और तुम यहां हो। उनकी इस बात का जवाबद देते हुए अटलजी ने कहा था कि शादी से ज्यादा जरूरी तो समाचार पत्र है, और जहां तक शादी की बात है तो वो मेरे बगैर भी हो जाएगी।