Exams preparation me family support in hindi

Exam बच्चे का Tension सभी को

Board Exam
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Exam के दिन करीब आ रहे हैं, Exam एक का होता है लेकिन उसका असर घर के सभी सदस्यों पर देखा जा सकता है, घर का माहौल बदलने लगता है, घर का छोटा बड़ा हर सदस्य Tension मे रहता है। ऐसे माहौल मे बच्चा और अधिक मानसिक दबाव महसूस करता है, जिसका विपरीत असर उसकी तैयारी पर पड़ता है।

ये सब क्यों होता है? एक Line मे कहूँ तो अज्ञानता के कारण। क्योंकि घर का छोटा या बड़ा कोई भी सदस्य ये नहीं जानता कि ऐसी परिस्थिति मे क्या करना चाहिये। आज मै आपको इस Article मे इसी बारे मे बताने जा रहा हूँ, यदि आप मेरे बताये अनुरूप व्यवहार करते हैं तो Exam के दौरान बच्चा और परिवार का हर सदस्य Tension free होकर न सिर्फ रह पाएंगे बल्कि अपने बच्चे को Exam मे बेहतर करते भी देखेंगे।

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मै यहाँ एक ऐसे छोटे भारतीय परिवार की कल्पना करके चल रहा हूँ जिसमे बच्चा केंद्र है और परिवार के अन्य सदस्यों मे उसके दादा, दादी, माता, पिता, बड़ा भाई, छोटी बहन परिधि मे है। परिवार का हर सदस्य इन दिनों बच्चे का अधिक से अधिक ध्यान रखना चाहता है, अच्छी बात है लेकिन जब यही Care अतिशय की शक्ल लेने लगता है तो परिणाम विपरीत होकर बच्चा Personal attention sickness का शिकार हो जाता है और फिर ताउम्र इससे ग्रसित रहता है।

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अब हम यहाँ परिवार के हर सदस्य को Exam के दौरान बच्चे के मानसिक और शारीरिक (Mental & Physical) सबलता (Strength) के लिये, क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये पर चर्चा करेंगे

सबसे पहले बात करते है केंद्र की Means, Exam के दौरान बच्चे (Candidate) को क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये

क्या करना चाहिये –

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  1. शांत और स्थिर रहना चाहिये (remain calm and steady) –
  2. समय प्रबंधन करना (Time Management) –
  3. अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना (Focus on Study) –
  4. अपनी समस्याओं को पहचानना (Identify problems) –
  5. मदद मांगने मे देरी नहीं करना (Don’t delay in asking for help) –
  6. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ का ध्यान रखना (take care of physical and mental health)

क्या नहीं करना चाहिये –

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  1. अपनी कमजोरियों को न छुपायें –
  2. Result को लेकर अतिमहत्वाकांक्षी (overambitious) न बने –
  3. औरों की सलाह और बातों पर ज्यादा ध्यान न दें –
  4. अपने खाने-पीने, सोने-जागने के Daily Routine को न बदलें –
  5. सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें –

परिवार के अन्य सदस्यों को इस दौरान क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये, को जानने से पहले मै बच्चे को क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये के यहाँ एक-एक Point को विस्तार से समझाता हूँ।

क्या करना चाहिये –

  1. अपनी समस्याओं को पहचानना –
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Generally बच्चों को लगता है, बच्चों को ही नहीं हम सभी को लगता है कि हम अपनी कमजोरियों/समस्याओं को जानते हैं लेकिन यह हमारा सिर्फ एक भ्रम है। क्योंकि कोई इंसान यदि अपनी सभी कमजोरियों/समस्याओं को जान ले तो फिर उसमे कोई कमी शेष नहीं रहेगी और वह पूर्ण (Complete) हो सकता है, जो अब तक तो इस धरा (पृथ्वी) पर मुमकिन नहीं हो पाया।

आगे भी इसकी संभावना नजर नहीं आती, आपने सुना ही होगा “अवतार पुरुष भी पूर्ण नहीं थे” किसी भी इंसान मे सभी Qualities नहीं होती कुछ न कुछ कमियाँ जरूर होती है। इसे समझने की जरूरत है कोई इक्का-दुक्का इंसान जो हमे गुणों की खान नजर आते हैं उनमे ये गुण आते कहाँ से हैं? तुममे वो Qualities क्यों नहीं है? एक Example लेते हैं, एक Class मे एक ही Topper होता है, क्यों?

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जबकि 25-30 बच्चे उस Class मे एक साथ, Same किताबों से, Same Teacher से और Same time duration मे पढ़ते हैं लेकिन एक ही Top करता है, क्यों? आपने कभी इस बारे मे Deeply नहीं सोचा होगा, आप क्या ऐसे कोई नहीं सोचता लेकिन आज मै आपको कहता हूँ जरा सोचिये, ऐसा क्यों होता है?

मै बताता हूँ, इसका राज इसी मे छुपा है “अपनी समस्याओं को पहचानना” जो बच्चा Class मे Top करता है वो अपनी Problems को जान जाता है और उन्हे दूर कर Topper बनता है। अभी आपको ये समझ न आया हो, इसे मै थोड़ा और विस्तार से समझाता हूँ। जब तक आप अपनी कमजोरी/समस्या को नहीं जानते या देख पाते, तब तक आप उसको Solve/Correct नहीं कर सकते या कहें कि उसके समाधान के बारे मे सोच भी नहीं पाते।

कमजोरियों को दूर करने के Process को समझिए – हो सकता है आपको अपनी कमजोरी के बारे मे पता हो लेकिन आप उसे Accept नहीं करते तब उसमे सुधार की कोई गुंजाईश नहीं रह जाती। ये ऐसा ही है जैसे कोई आपके घर आकर आपको कुछ देना चाहता है लेकिन आप उसके लिये दरवाजा नहीं खोलते और अंदर से ही उससे बातें करते हैं फिर वो कुछ देर इंतजार करने के बाद वापस चला जाता है।

ऐसे ही जब तक आप अपनी कमजोरी को स्वीकार नहीं करते तब तक आपका दिमाग उसे सुधारने के बारे मे सोचना शुरू नहीं करता और जब तक आपका दिमाग सोचेगा नहीं तब तक आपको अपनी कमजोरी दूर करने का उपाय सूझेगा नहीं, और आप जानते हैं कोई भी सुधार सोच से ही शुरू होता है। इसीलिए लोग अपनी कमियों को जानते हुये भी उन्हे सुधार नहीं पाते।

क्या नहीं करना चाहिये –

  1. औरों की सलाह और बातों पर ज्यादा ध्यान न दें –
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इस दौरान अक्सर ऐसा होता है कि हर कोई बच्चे पर अपनी सलाह थोपता रहता है, मैंने क्या किया था? कैसे तैयारी की थी? या तैयारी कैसे करना चाहिये? क्या खाना चाहिये? कब उठना, कब सोना, कब पढ़ना चाहिये? याददाश्त कैसे बढ़ाना चाहिये? Bla bla bla …

ऐसे मे अक्सर बच्चे Confuse हो जाते हैं क्योंकि बच्चे जल्द ही दूसरों से बहुत जल्दी Impress हो जाते है, खासकर तब जब वे कोई drastic situation मे हों, ऐसे मे कई बार उन्हे लोगों की बाते सही लगती हैं क्योंकि उन्हे लगता है कि वे उसकी समस्या का सटीक समाधान है और वो अपना तरीका बदलने को तैयार हो जाते हैं, जो इस समय उनके लिये नयी राह पकड़ने जैसा होता है Time consuming & long.

इस दौरान औरों की सलाह पर ध्यान देने से बेहतर है कि बच्चे को अपने तरीकों मे सुधार कर अपनी तैयारी पर Focus करना चाहिये।

दोस्तों इस Article को मै अभी यही रोक रहा हूँ क्योंकि इसे पूरे विस्तार से एक साथ लिखना यहाँ संभव नहीं है, अगर आपको इसे पढ़कर कुछ नया लगा हो तो मुझे बतायें, मै आपके लिये इसे आगे विस्तार से लिखूँगा। धन्यवाद!

 

 

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