कुछ DevRatna’s Quotes के बारे मे

DevRatna’s Quotes आपके दैनिक जीवन को उत्साह और नये जोश से भर देंगे। इन Quotes को ध्यान से पढ़ने और समझने पर आप अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं, ये Quotes आपके वास्तविक जीवन से संबंधित जीवंत समस्याओं को ध्यान मे रखकर बनाए जाते हैं।
जैसा कि आप जानते हैं Mission DevRatna – “हर बच्चा बनेगा होशियार – हर युवा को मिलेगा रोजगार” का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को उसकी आंतरिक (internal characteristics) विशेषताओं से परिचित करवाना है और हर युवा को बेरोजगारी के भस्मासुर से बचाकर उसका जीवन सहज-सुगम-सरल बनाना है ताकि हर बच्चा अपना जीवन हर पल – हर दशा मे आनंद से जिये क्योंकि हम सभी जानते हैं कि “सभी को ये जीवन एक बार ही मिलता है” और हम (Mission DevRatna) इसे ऐसे ही नहीं जाने दे सकते।
DevRatna’s Quotes (Mission DevRatna) के माध्यम से हम, बच्चों, Students और युवाओं की पढ़ाई की समस्यायें, दैनिक जीवन की समस्यायें, व्यवहार सम्बन्धी समस्यायें, पारिवारिक व अन्य रिश्तों से सम्बंधित समस्यायें, पढ़ाई के बाद बेरोजगारी की समस्यायें और भी कई तरह की समस्याओं और खास तौर पर उनकी मानसिक (मन:स्थिति) समस्याओं के बारे मे सभी Parents, Teachers, Politicians, Businessman, Government etc. और पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं और उनका स्थाई समाधान (Permanent Solution) कैसे निकाला जा सकता है, ये भी उन्हे समझाना चाहते हैं।
बच्चों को आज ही समझें (It’s Now or Never) और अपना और बच्चों का भविष्य उज्वल व सुरक्षित बनायें, कैसे? जानने के लिये आज ही पढ़ें – “करेले के पकवान – Child-Parent-Family” – CA DevRatna
हम जानते हैं कि ये सब इतना आसान नहीं है लेकिन किसी को तो Initiate करना पड़ेगा ताकि दुनिया का ध्यान इस तरफ खींचकर उन्हे नये तरीके से सोचने के लिये जागरूक किया जा सके।

आज शायद ही कोई Parents होंगे जो School/College मे पढ़ाई की हकीकत से वाकिफ नहीं होंगे, उन्हे इस बात का अनुभव है (क्योंकि वे इस दौर से गुजरकर ही आज यहाँ पहुंचे हैं) कि आज की पढ़ाई से सिर्फ Degree ही हासिल होती है। नौकरी कैसे पाएं? या Business कैसे करें? करने का Knowledge नही आता/मिलता फिर भी वे अपने बच्चों को उसी राह चलने को मजबूर करते हैं।
बच्चे का मन पढ़ाई मे नहीं लगता या वह पढ़ाई मे लगातार अच्छा Perform नहीं कर पाता, तब भी उसके माता-पिता उसकी Problem को अनदेखा कर उसे पढ़ाने के लिये अपना पैसा और शक्ति दोनों बर्बाद करते चले जाते हैं और जब ऐसा बच्चा पढ़कर निकलने के बाद बेरोजगार घूमता है तो यही माँ-बाप उसे निकम्मा, नालायक कहने से नही चूकते और उसे उलाहना भी देते हैं कि “हमने अपनी Life मे इतने Compromise करके, अपना पैसा (अपनी जमा पूंजी सहित) खर्च करके तुझे पढ़ाया-लिखाया और तेरी वजह से अब हमे ये दिन देखने पद रहे हैं” सोचिये, गलती किसकी है? और दोषी कौन है?

आम तौर पर सभी Parents का यही सोचना होता है कि बच्चे को अच्छे Sorry, अच्छे नहीं मंहगे (Expensive) School/College मे भेजने से उसका भविष्य बन जाएगा। कोई अनपढ़ माँ-बाप यदि ऐसा सोचे तो समझ मे आता है कि उन्हे इसका अनुभव नहीं है क्योंकि वो कभी School/College नहीं गये, उन्हे हकीकत का कुछ पता नहीं है लेकिन आज शायद ही कोई Parents होंगे जो School/College नहीं गये होंगे इसलिये उन्हे पता है कि 20-22 साल पढ़ाई मे मेहनत करने के बाद कोई बच्चा, एक नौकरी या व्यापार करने के लायक भी नहीं बन पाता।
क्योंकि उन्होंने खुद School/College जाकर पढ़ाई मे अपने 20-22 साल खराब किये हैं लेकिन पता नही ऐसे Parents किस कारण या डर की वजह से, वो अपने ही बच्चे की Life के Most Important 20-22 साल जानबूझकर खराब कर देते हैं और अपना लाखों रुपये भी।

बच्चा मासूम, नासमझ और अज्ञानी होता है, उसे अपने अच्छे-बुरे की समझ नहीं होती और वो अपने भरण-पोषण के साथ-साथ अपने Future सम्बन्धी सभी Decision के लिये भी अपने माता-पिता या पालकों पर आश्रित होता है। उसकी यही लाचारी की वजह से वह जीवन मे अपनी वास्तविक पहचान से वंचित रह जाता है क्योंकि जो लोग उसकी भलाई के लिये Decision लेते हैं वे उसकी भलाई के लिये Decision लेते समय उसकी Capacity व Capability का ध्यान नहीं रखते बल्कि अपनी आकांक्षाओं का बोझ उसके कंधों पर रख देते हैं।
चूंकि बच्चे का भरण-पोषण उसके माँ-बाप के हाथ मे होता है इसलिये बच्चा उनके निर्णयों को मानने को बाध्य होता है, इसी के चलते माँ-बाप अपनी मन-मर्जी उस पर थोपते चले जाते हैं और बच्चा यथाशक्ति उन्हे पूरा करने के लिये मेहनत (बेमन से ही सहीं) करता रहता है। सब कुछ सही चलता रहता है पर सिर्फ तब तक ही जब तक Result का समय सामने न आ जाये Means बच्चे की पढ़ाई खत्म होने के बाद नौकरी की बात ( जब माँ-बाप अपने Investment पर Return के लिये लालायित होते हैं) और बच्चे को उसकी 22 साल की पढ़ाई के आधार पर नौकरी नहीं मिलती तो भी दोषी बच्चा ही कहलाता है।