ऐसा कोई हुआ ना जिसे इस प्रश्न ने छला ना –

Life मे सिर्फ वही इस सवाल “पढ़ाई मे मन नहीं लगता, क्या करूँ?” से बच पाया जिसने आज-कल के स्कूल का मुंह नहीं देखा और अंग्रेज लार्ड मैकले Suggested अंग्रेजों द्वारा थोपी और हमारे देश के रहनुमाओं की “जो वो (अंग्रेज) दे गये उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता” सोच के चलते, अब तक जारी शिक्षा (Education) से भगवान की कृपया से बच गया।
बच्चों का पढ़ाई मे मन न लगने के कारण और उनका समाधान जानने के लिये आज ही पढ़िये – “STRESS FREE EDUCATION” (Hindi Edition) – CA DevRatna
Student life मे हर बच्चा इस समस्या से जूझता है। मुझे नहीं लगता, Student life मे आज तक कोई व्यक्ति इस परेशानी से बचकर निकल पाया है और उस दौरान ना जाने कितनी बार उसने खुद से, अपने माता-पिता, Teacher, बड़ों से ये सवाल किया होगा – “मेरा पढ़ाई मे मन नहीं लगता, क्या करूँ?” लेकिन मजाल है किसी ने सीधे मुंह जवाब दिया हो इसलिए आज भी बच्चे इस सवाल का जवाब मांगे जा रहे हैं।
पढ़ाई पर मुफ़्त की सलाह –

बच्चा जब भी किसी से पूछता है, “मेरा पढ़ाई मे मन नहीं लगता, मै क्या करूँ?” तो उसे, उन्ही लोगों से लंबा-चौड़ा ज्ञान का Dose मिलता है जिन्हे खुद कभी इस सवाल का जवाब नहीं मिला और वे बच्चों को ऐसे-ऐसे तरीके बताते हैं जो कभी उन्होंने ना जाने, ना ही अपनाये।
कहते है दुनिया मे सबसे ज्यादा दी जाने वाली चीज है “मुफ़्त की सलाह”, हर कोई देता फिरता है और दुनिया मे सबसे कम ली जाने वाली चीज भी “सलाह” ही है, कोई लेता ही नहीं तो “पढ़ाई मे मन नहीं लगता, क्या करूँ?” जैसे प्रश्नों पर बड़े लोग सलाह दिए चले जाते हैं पर बच्चे, उनसे ज्यादा समझदार हैं, सलाह लेते ही नहीं।
एक सत्य जिसे हर पुरानी पीढ़ी कभी स्वीकार नहीं करती – हर क्षेत्र मे “हर नई पीढ़ी अपनी पुरानी पीढ़ी से दो कदम आगे होती है” लेकिन सिर्फ उम्र मे बड़े होने की वजह से बड़ों को ये अहंकार जकड़े होता है कि हम बच्चों से ज्यादा जानते हैं। इस एक गलत फहमी की वजह से हर पुरानी पीढ़ी अपनी नई पीढ़ी पर अपना पुराना, अप्रचलित, अनुपयोगी ज्ञान थोपते रहते हैं और नई पीढ़ी के उन्नति के रास्ते बाधित कर देते हैं।
जब बच्चे ना-नुकर करते हैं या विरोध करते हैं तब बड़े इसे Generation gap कहकर या “तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता, तुम नालायक के नालायक ही रहोगे” कहकर अपनी झुँझलाहट निकाल लेते हैं और अपने रास्ते लग जाते हैं।
बच्चों को सहीं तरीके कैसे सिखायें? जानने के लिये अभी पढ़ें – “करेले के पकवान”
यहाँ कुछ प्रश्न बहुत गौर करने वाले है कि क्या सचमुच बच्चे अपनी इस समस्या या अन्य समस्याओं का समाधान नहीं करवाना चाहते? वे किसी की सलाह नहीं मानते? बड़ों कि सलाह ना मानकर, क्या वे अपने बड़ों का अपमान करते हैं?
बच्चे सदा Obedient क्यों नहीं रह पाते –

बच्चों और बड़ों मे ना बनने के कई कारण हैं लेकिन एक बहुत Important reason मै आपको बताता हूँ। बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं, ये आप सभी जानते हैं लेकिन कब तक? जब तक बच्चे विचारशील नहीं हो पाते। बड़े उन्हें जो भी बताते हैं, बच्चे उसे स्वीकार करते हैं (क्योंकि उन्हे पता नहीं होता कि सहीं क्या है? और गलत क्या है?) लेकिन जैसे ही बच्चों का विवेक (सोचने-समझने की शक्ति) Develop हो जाती है, वे बड़ों की सीख as it is accept करना बंद कर देते हैं, यहीं से बच्चे और बड़ों के बीच सामंजस्य टूटने लगता है।
इस Stage पर होता क्या है? यहाँ बच्चे अपने बड़ों के अलावा दूसरे लोगों के संपर्क मे भी आते हैं, उनसे भी सीखने की कोशिश करते हैं तब Conflicts पैदा होते है और वो चीजों को Judge करने के लिये अपना तरीका अपनाते हैं जो उन्हे बताया जाता है, उसे वे खुद करके देखते हैं और जब उन्हे अपेक्षित परिणाम (Expected result) नहीं मिलता उनका अपने बड़ों या अन्य लोगों पर से विश्वास उठने लगता है। इसे एक example से समझिए –
जब बच्चा रोता है तो बड़े उसे कहते हैं चुप हो जाओ नहीं तो बागड़बिल्ला तुम्हें उठाकर ले जायेगा या दूध नहीं पियोगे तो तुम्हें ताकत नहीं आयेगी या पढ़ोगे तो Intelligent कहलाओगे और छोटी सी गलती पर कोई उसे Stupid कह देता है, जब वो थोड़ा विवेकशील होता है और देखता है कि वैसा कुछ नहीं होता जैसा उसे बताया गया था तब वो बड़ों की सुनना कम कर देता है या बंद कर देता है।
पढ़ाई के नाम पर बड़े हमेशा बच्चों को धोखा देते हैं

पढ़ाई के नाम पर छलावाबड़े बच्चों को सदियों से ऐसा धोखा देते आ रहे हैं जिससे बड़े और बच्चों के रिश्तों मे कटुता इतनी बढ़ जाती है कि बच्चे अपने ही पालन हारों का बुढ़ापा नर्कमय बनाने से नहीं हिचकते।
क्या है वो धोका – बच्चों को पढ़ाई करवाने के लिये बड़े हमेशा उन्हे कहते हैं “पढ़-लिखकर तुम राजा बेटा बन जाओगे” या “पढ़ोगे तो Life मे तुम जो चाहोगे, तुम्हारे पास वो सब होगा”, “10th Board मे अच्छे Marks ले आओ आगे Life smooth हो जायेगी” वो मेहनत करता है अच्छी Rank लाता है फिर उसे कहा जाता है “12th Board मे मेहनत कर लो फिर आगे के सब रास्ते खुल जाएंगे”, बच्चा वो भी कर लेता है फिर “NEET, JEE etc. निकाल लो तो Life set हो जायेगी” वो सब करता जाता है और अंत मे पाता है कि Life set होना तो दूर जिन्होंने ये कह-कहकर सब कुछ करवाया अब वो ही उसे “काम का ना धाम का दुश्मन अनाज का” “नालायक-निकम्मा” कहकर ताने देते हैं और दुनिया मे अकेले धक्के खाने के लिये छोड़ देते हैं।
बच्चों से पहले हर पालक (माता-पिता) को इस किताब को पढ़ लेना चाहिये – “काबिल बनो – सफलता झकमारकर पीछे आयेगी”
पढ़ाई मे मन लगाने के Traditional तरीके
आज भी जब कोई बच्चा पूछता है कि “मेरा पढ़ाई मे मन नहीं लगता” तो उसे हम जो उपाय बताते हैं वे Useless हैं इसी वजह से ये सवाल आज तक वैसे का वैसा ही खड़ा है।
बच्चों की एक विशेषता होती है, बच्चे एक ही सवाल बार-बार तब तक दोहराते हैं जब तक उसका स्थाई समाधान (Permanent Solution) उन्हे नहीं मिल जाता लेकिन जब समाधान नहीं मिलता और वो वैसे ही निराशा लिये बड़े हो जाते हैं तब वे यकिन कर लेते हैं कि इन सवालों का कोई जवाब है ही नहीं इसलिए बड़े फिर ऐसे सवाल करना छोड़ देते हैं।
ये सिलसिला अब खत्म होने वाला है क्योंकि अब बच्चों को “पढ़ाई मे मन नहीं लगता, क्या करूँ?” सवाल का यहाँ जवाब मिलने वाला है साथ ही उनके ऐसे सभी अनुत्तरित सवालों के जवाब भी उन्हे यहाँ मिलते रहेंगे।
लेकिन पहले हम यहाँ उन उपायों की बात करेंगे जिन्हे बताकर, आज तक उन्हे Confuse किया जाता रहा है (क्योंकि ये सुनने मे तो बहुत अच्छे लगते है लेकिन Practical difficulties की वजह से इन पर अमल करना मुश्किल है।) फिर मै आपको वो उपाय बताऊँगा जिसके बाद कोई बच्चा फिर ये सवाल कभी नहीं पूछेगा।

बच्चों को “मेरा मन पढ़ाई मे नहीं लगता, क्या करूँ” पूछने पर सदियों से बताये जाने वाले उपाय:
- टाईम-टेबल बनाओ – Time table बनाकर पढ़ने वाला बच्चा कभी ये सवाल खड़ा नहीं करेगा लेकिन तब, जब उसे पढ़ाई मे Interest होगा means उसका मन पढ़ाई मे लगता हो वर्ना हर दिन वह सिर्फ Time table follow करने की जद्दोजहद मे ही लगा रहेगा और रोज नये Gilt से भरता जायेगा।
- नियत समय पर पढ़ाई करो – जोर जबरदस्ती करके बच्चे को नियत समय पर पढ़ने के लिये बिठाया जा सकता है और कुछ दिनों मे वो इसका आदि भी हो सकता है लेकिन तब भी वह समय ही काटेगा, ऐसे वो पढ़ाई तो करेगा नहीं लेकिन पढ़ाई का समय कैसे काटना है? घर वालों को कैसे बेवकूफ बनाना है? के नये-नये तरीके खोजने मे माहरत जरूर हासिल कर लेगा।
- Targeted study करो – Target fix कर लेने से Target achieve नहीं हो जाते, उन्हें achieve करने के लिये मेहनत, लगन और निरन्तरता की आवश्यकता होती है जो सिर्फ काम करने मे मजा आने से ही संभव होता है। Target fix करने means planning करने मे तो सभी को मजा आता है और उसे हर कोई Enjoy भी करता है लेकिन जैसे ही उसे अमल करने की बारी आती है उसे करने के बजाय हम अपनी ही Planning मे कमियाँ निकालकर उसे Re plan करना ज्यादा पसंद करते हैं और ये सिलसिला चलता जाता है और हम कही नहीं पहुँच पाते।
- ब्रह्म महूर्त मे उठकर पढ़ो – जब पढ़ाई मे मन ही ना लगता हो तो किसी भी समय पढ़ो, पढ़ाई होगी ही नहीं। पढ़ाई मे मन लगने का समय से क्या लेना देना, लेकिन बताने वाले बताते हैं, सुबह मन ताजा और शांत रहता है, शोर शराबा नहीं होता है लेकिन मन के भीतर जो अशान्ति और शोर-शराबा चलता रहता है उसका क्या करोगे, उसे कैसे रोकोगे। ब्रह्म महूर्त मे पढ़ाई तो नहीं पर बच्चों की नींद और हाजमा जरूर खराब हो सकता है।
- मेडिटेशन और योगा करो – बाबाओं ने योगा और मेडिटेशन के बहाने हजारों करोड़ का Business empire खड़ा कर लिया, “योग भगाये रोग” बोलकर लोगों को योगा सिखाकर योगी बनाया फिर बाबाओं ने उन्ही योगियों को अपनी दवाइयाँ चिपका कर अपना Empire खड़ा कर लिया। लोग निरोगी हो या ना हो पर बाबाओं की दौलत “दिन दूनी रात चौगुनी” जरूर बढ़ रही है। आज-कल Hectic schedule की वजह से पढ़ने वाले बच्चों के पास खाने-पीने का Time तो होता नहीं ऐसे मे वो Meditation और योगा के लिये Extra time कहाँ से लायेंगे।
- अपने पसंद के विषय चुनो – आज के जमाने मे इतनी स्वतंत्रता (Liberty) किस बच्चे को मिलती है कि अपनी मर्जी से वो कुछ कर सके, और किसी को मिल भी जाये तो वो इतना Confused रहता है कि वो समझ ही नहीं पाता कि उसकी पसंद क्या है? हमारे Rotten education system मे बच्चे को 10th के बाद Subjects चुनने होते हैं लेकिन बड़ों के हिसाब से तब तक वो इतना समझदार नहीं हो पाता कि अपना अच्छा-बुरा समझ सके। 10th तक बच्चे बगैर मन लगे कैसे पढ़ाई करे?
- Notes बनाकर Study करो – पढ़ाई करते व्यक्त अपने Notes बनाने चाहिये इससे Subject को अच्छे से समझने मे मदद मिलती है और बहुत से Doubts अपने आप ही Clear हो जाते हैं लेकिन आज के दौर मे कौनसा Teacher पढ़ाते समय बच्चे को इतना समय देता है कि वो अपने Notes बना सके और Notes बच्चा तभी बना सकता है जब उसे Subject या Chapter अच्छे से समझ आया हो। बच्चे Notes बनाने लगे तो Ready Notes Market का क्या होगा। इस तरह पढ़ाई करना Long term process है और हमारा System तो बच्चों को झट-पट Recipes सिखाता है।
- Group Study करो – Group study बहुत कारगर Study method है लेकिन उसके लिये बच्चों का Group होना चाहिये और उन्हे एकांत भी चाहिये पर आज-कल के माँ-बाप तो बच्चों को अकेला छोड़ने के ख्याल से भी डर जाते हैं, वो उन्हे अंडे से बाहर निकलने ही नहीं देना चाहते इसी वजह से बच्चे इस दुनिया मे अपने प्रतिभा के पंख फैलाकर उड नहीं पाते और जीवन भर बिन पंखों के छटपटाते रहते हैं।
- खुद को Motivated रखो – Self motivated रहने के लिये इंसान को खुश रहना आना चाहिये, जिसके लिये उसे Self space चाहिये, जहाँ वो खुद को जान सके, खुद को पहचान सके और ये सब होता है एकांत मे लेकिन हम हमारे बच्चों को भीड़ का हिस्सा बनाने मे लगे हैं जहाँ बच्चा सिर्फ दूसरों को देखकर जीता है, अकेले होते ही उसे दुनिया खत्म लगती है। आज हमारी आकांक्षाओ के तले बच्चे इतने दब गये हैं कि उनका खुद तक पहुंचना नामुमकिन सा लगता है।
- मन को शांत रखो, प्रकृति के करीब रहो – मन को शांत रखना जिसे आ गया उसे फिर दुनिया की कोई समस्या, समस्या नहीं लगती लेकिन मन को शांत रखना बच्चों का खेल नहीं। Meditation की दुकान खोलकर बैठे लोग मन को शांत करने के लिये दिन-रात तरह-तरह की Methods से Meditation करवाते हैं वहाँ भी लोगों का मन शांत तो होता नहीं बल्कि एक नई उलझन मे पड जाता है कि मेरे लिये कौनसी Meditation method ठीक होगी। बच्चों को हमारा Education System जल्दबाजी और दौड़ना सिखाता है और मन को शांत करने के लिये ठहराव चाहिये और हम कहते हैं कि रुके तो पिछड़ जाओगे – भागो।
- रटो मत समझकर पढ़ो – सही है समझकर पढ़ने से विषय की अच्छी समझ हो जाती है लेकिन किसी विषय या Topic को समझकर पढ़ने के लिये बच्चे को अपना समय लगता है जो आज-कल के बच्चों के पास होता नहीं।
ऐसे ही और भी कई तरीके बच्चों को सुझाये जाते हैं लेकिन आज के दौर मे वे कारगार नहीं हैं। बच्चों का एक तो पढ़ाई मे मन नहीं लगता ऊपर से इतने Task का Burden, ऐसे पढ़ाई करके बच्चे और ज्यादा Frustrate हो जाते हैं और फिर Suicide जैसा घृणित कृत्य कर बैठते हैं और हमारा समाज इसे एक दु:खद घटना कहकर भुला देता है। शिक्षित या शिक्षा ले रहे, एक भी बच्चे का Suicide करना, हमारे Rotten Education System की व्यर्थता बताने के लिये काफी है। Education System विपरीत से विपरीत परिस्थितियों मे भी हमे Survive करने के रास्ते खोजने वाला होना चाहिये ना कि Suicide करने के लिये मजबूर करने वाला।
पर हमारी लाचारी और विडंबना है कि हमे इसी Education System मे अपने बच्चों को पढ़ाना है, Educate करना है लेकिन एक नयी सोच और थोड़े से प्रयास से आप इस Education System के दुष्प्रभावों से अपने बच्चों को बचा सकते हैं।
कैसे? ये जानने के लिये आज ही पढ़ें : “काबिल बनो – सफलता झकमारकर पीछे आयेगी”
My Suggested Remedies –
आइये अब मै आपको वो तरीके बताता हूँ जिन्हे जानने के बाद कोई भी बच्चा “मेरा पढ़ाई मे मन नहीं लगता, मै क्या करूँ?” जैसे सवाल दोबारा नहीं पूछेगा।

बच्चों का पढ़ाई मे मन नहीं लगता, क्यों? इस सवाल का जवाब आप ढूँढोगे तो फिर वही बेसिर-पैर के 1760 जवाब आपको हर जगह दिख जाएंगे जैसे –
- Destruction
- Lack of Interest in study
- Phobia
- Addictions
- Mobile, TV, Social Media
- Bad atmosphere & Surroundings
- Bad company
- Study under pressure
- Unplanned study
- Poor physical & mental condition
- Lack of will power & concentration
- Bad habits etc.
अब मै आपसे कहूँ कि ये सब फालतू की बातें हैं और “बच्चे का पढ़ाई मे मन ना लगने” से इनका कोई लेना देना नहीं है तो आपको यकिन नहीं होगा, होना भी नहीं चाहिये क्योंकि मै भी सिर्फ “खुद करो और जानो” पर ही यकिन करता हूँ और जब तक आप “खुद करके नहीं जान लेते” मुझे भी आत्मसंतुष्टि नहीं मिलेगी।
Regenerate Interest in study –
किसी “बच्चे का पढ़ाई मे मन ना लगने” का सबसे महत्वपूर्ण कारण है उसकी रुचि (Interest) अब आप सोचेंगे ये तो हम जानते हैं लेकिन आप ये नहीं जानते कि उसका पढ़ाई मे अब Interest क्यों नहीं रहा? क्या उसका शुरू से पढ़ाई मे Interest नहीं था? ऐसा नहीं है,
क्योंकि हर बच्चा नये काम करने मे हमेशा Interested होता है, ये आप जानते होंगे यदि आपने छोटे बच्चों को ध्यान से देखा हो तो। बचपन मे बच्चा कितने जल्दी सीखता है, आपको पता होगा, हर माँ-बाप अपने बच्चे की इस काबिलियत की बहुत नुमाईश करते हैं, जब आप किसी के घर जाते हैं और उनके यहाँ छोटा बच्चा हो तो वे उसे आपके सामने Poem या कुछ करके दिखाने के लिये कहते हैं और बच्चा बहुत मजे लेकर वो करता है, फिर क्या हो जाता है कि इतने काबिल बच्चे के बड़े होते ही उसका पढ़ाई से मन ऊब जाता है?
इसका कारण बच्चे का भला चाहने और भला करने वाले हम लोग ही हैं जैसे माता-पिता, Teachers और उसके आस-पास के लोग। आप सोचेंगे ये सब तो बच्चे के शुभचिंतक होते हैं और हमेशा उसकी भलाई मे लगे रहते हैं, सच है लेकिन अज्ञानता वश इनके गलत तरीके अपनाने से बच्चे का पढ़ाई से मोह भंग हो जाता है।
अब आप कहेंगे यही तो बच्चे की समस्या है, जो हो गया सो हो गया, अब ये बताइये कि इस समस्या का हल क्या है? क्या वो पढ़ाई मे अपना खोया Interest वापस पा सकता है? या फिर ये मुमकिन ही नहीं है?
यदि बच्चा किसी भी काम मे Interest लेता है (चाहे वो Mobile हो TV हो या खेल हो या कुछ और) तो समझिये कि उसका पढ़ाई मे भी उतना ही Interest फिर से जाग सकता है।
पढ़ाई मे Interest फिर से वापस पाने के लिये बच्चों को सबसे पहले ये जानना होगा कि उसका पढ़ाई मे Interest कैसे कम या खत्म हो गया? फिर उस Secret को जानना होगा कि किसी काम या चीज मे हमारा Interest कैसे पैदा होता है।
बच्चों एक बार आपका Interest जाग गया तो जैसे आपको Mobile चलाते हुये या TV देखते हुये किसी बात का होश नहीं रहता, ऐसे ही पढ़ाई करते हुये भी आपको किसी बात का होश नहीं रहेगा और आप पूरी तल्लीनता से पढ़ाई मे रम जाओगे।
ये सब जानने के लिये आज ही पढ़ें – “काबिल बनो – सफलता झकमारकर पीछे आयेगी”
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