Article 370 & 35a कैसे आया था अस्तित्व मे

1947 मे जम्मू-कश्मीर के आखिरी महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने को लेकर एक विलय पत्र (Merger Letter) पर हस्ताक्षर किए थे।
1950 में भारतीय संविधान (Indian Constitution) लागू हुआ। जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद-1 के तहत भारत का एक राज्य घोषित किया गया। जबकि आर्टिकल 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया।
1951 मे जम्मू-कश्मीर के संविधान का मसौदा तैयार करने को लेकर राज्य की पहली संविधान सभा की बैठक हुई। इसमें सभी सदस्य शेख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के थे।
1952 मे जम्मू-कश्मीर संविधान सभा में कश्मीर के नेताओं ने केंद्र सरकार के साथ चर्चा की। इसमें केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर एक समझौता हुआ।
1956 मे जम्मू-कश्मीर ने खुद को भारत का अभिन्न अंग घोषित कर दिया और अपना संविधान अपनाया।
इस तरह जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा तो बना लेकिन Article 370 और 35a की वजह से जम्मू-कश्मीर और वहाँ के नागरिकों को विशेष अधिकार मिले।
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Article 370 & 35 a क्यों थी Special?

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में सिर्फ रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था, लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र (India) को राज्य सरकार (जम्मू-कश्मीर) की मंजूरी चाहिए होती थी।
विशेष दर्जे की वजह से जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी means भारत के राष्ट्रपति के पास (जम्मू-कश्मीर) राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। 1976 का शहरी भूमि कानून (जम्मू-कश्मीर) राज्य पर लागू नहीं होता था। भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे। भारतीय संविधान की धारा 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है लेकिन यह जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता था।
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कश्मीर की जनता को धारा 370 के तहत, कुछ विशेष अधिकार मिले हुए थे। इस धारा की वजह से कश्मीर में आरटीआई (RTI) और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते थे। जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी। जम्मू-कश्मीर का अलग राष्ट्रध्वज (National flag) था। जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का था। जम्मू-कश्मीर के अंदर भारत के राष्ट्रध्वज (National flag) या राष्ट्रीय प्रतीकों (National Symbols) का अपमान अपराध नहीं होता था।
भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेश जम्मू-कश्मीर के अंदर मान्य नहीं थे। भारत की संसद (Parliament) को जम्मू-कश्मीर के संबंध में सीमित क्षेत्र में कानून बनाने का अधिकार था। जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती थी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी।
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अनुच्छेद 35A क्या था मतलब?
35A से जम्मू-कश्मीर के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते थे। 14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे, उन्हीं को स्थायी निवासी माना जाता था।
जो जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं था, वह राज्य में संपत्ति नहीं खरीद सकता था। जम्मू-कश्मीर सरकार की नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर सकता था। वहां के विश्विद्यालयों में दाखिला नहीं ले सकता था, न ही राज्य सरकार की कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता था।
अनुच्छेद 370 में समय के साथ कई बदलाव भी हुए, 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था, उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री होता था, इसे बाद में बदला गया। इसी तरह के कई और महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
कैसे खत्म हुये Article 370 & 35 a

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2019 में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया, केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर से संविधान के Article 370 को हटाने के लिए एक बिल संसद से पेश किया, जिसे मंजूरी मिलने के बाद आर्टिकल 370 निरस्त हो गया, जिसने इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण स्वायत्तता दी थी और जो जम्मू और कश्मीर राज्य के लोगों को विशेषाधिकार प्रदान करता था और लगभग 12 मिलियन से अधिक लोगों का राज्य भी दो संघ प्रशासित क्षेत्रों में विभाजित हो गया।
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फिर साल 2023 मे सुप्रीम कोर्ट मे जम्मू और कश्मीर से Article 370 हटाए जाने को लेकर 16 दिन तक सुनवाई चली। इस मामले में दो अगस्त को बहस पूरी हुई और बेंच ने 5 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल, 4 महीने, 6 दिन के बाद Article 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर 11 दिसंबर 2023 को अपना फैसला सुनाया।
Supreme Court का ऐतेहासिक फैसला

पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 को रद करने वाले केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा।
11 दिसम्बर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले मे कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। 370 को हटाना संवैधानिक तौर पर सही है।
सीजेआई ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा लिया गया फैसला वैध है। भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू हो सकते हैं।
CJI ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश भारत के राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं है। हम निर्देश देते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
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सीजेआई ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि चुनाव आयोग 30 सितंबर, 2024 तक जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराने के लिए कदम उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के लिए जरूरी नहीं कि जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की सिफारिश पर ही 370 पर कोई आदेश जारी करें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Article 370 का अस्तित्व समाप्त होने की अधिसूचना जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के भंग होने के बाद भी बनी रहती है।
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